पृथ्वी का जीवन ?
यदि हमें पृथ्वी के जीवन को समझना है तो हमें पृथ्वी को किसी जीव की भांति सजीव समझना होगा आज हम बताने बाले हैं की किस प्रकार पृथ्वी का जीवन एक जीव की भांति चलता है।
पृथ्वी भी सांस लेती है जानें कैसे
दोस्तों आप लोगों को जानकर हैरानी होंगी की पृथ्वी भी सांस लेती है।पर पृथ्वी की एक सांस एक साल में पूरी होती है।पृथ्वी की जिंदगी जंगलो से है।और साथ ही पृथ्वी के ज्यादा तर जंगल उत्तरी गोलार्द्ध में ही हैं।जब उत्तर में बसंत का मौसम आता है।तब ये जंगल हवा में मौजूद कार्बनडाइऑक्साइड CO2 को सोख लेते हैं और बड़े हो जाते हैं और जमीन हरी भरी हो जाती है।इससे पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद कार्बनडाइऑक्साइड CO2 कम हो जाती हैं।और साथ ही जब पतझड़ का मौसम आता है तो पेड़ आपने पत्ते गिराते हैं।तो उनके सड़ने से कार्बनडाइऑक्साइड CO2 पृथ्वी के वायुमंडल में दोवारा वापस पहुँच जाती है।
साथ ही साल के दूसरे हिस्से में यही काम दक्षिण गोलार्द्ध में होता है।मगर दक्षिण गोलार्द्ध ज्यादातर समुद्र हीं हैं।इस लिए उत्तर के जंगलों की वजह से ही दुनिया में कार्बनडाई ऑक्साइड CO2 में होने वाले बदलाव तय होते हैं।और सालो से हमारी पृथ्वी इसी तरह सालों सांस लेती आ रही है।और एक जीव की भांति जीवीत है।
कार्बनडाई ऑक्साइड की मात्रा वायु मंडल में तेजी से बढ़ना
पर बीते कुछ सालों में पृथ्वी पर कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा में इतनी तेजी से वृद्धि हुई है कि जिस को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।जिस तेजी से पृथ्वी पर कार्बन डाई ऑक्साइड की वृद्धि हो रही है ऐसा पहले कभी नहीं हुआ ।साफ है पृथ्वी की जो जिंदगी है वह जंगलों से है ।जंगल काटे जा रहे हैं और उनके स्थान पर रोज नई फैक्ट्रियां कारखाने खुल रहे हैं ।जो कार्बन डाइऑक्साइड की वृद्धि में और अपना योगदान दे रहे हैं ।जो दिन-ब-दिन कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा पृथ्वी पर बढ़ती जा रही है ।जिसे की हमारी पृथ्वी को एक जीव की भांति सांस लेने में समस्या हो रही है।
समुद्री जल स्तर का तेजी से बढ़ना
जिससे हमारी पृथ्वी के जो ग्लेसियर हैं ।वह पिघल रहे हैं समुद्र में जलस्तर साल दर साल बढ़ता जा रहा है ।जिससे समुद्र के किनारे के शहरों की डूबने की संभावना पैदा हो गई है ।और पृथ्वी के तापमान के बारे में तो आप सब लोग जानते ही हैं कि बीते कुछ सालों में पृथ्वी के तापमान में जिस तेजी से वृद्धि हो रही है ।यह पृथ्वी का महाप्रलय की ओर जाने का संदेश है ।पर इतनी साफ संकेतों के बावजूद भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्बन डाइऑक्साइड के प्रभाव को कम करने से लेकर रोकने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया जा रहा है। यह बहुत दुखद बात है की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्लाइमेट चेंज के साफ-साफ संकेत मिलने वजूद चीन जैसे देश जो अभी कुछ सालों से ही उद्योग तरक्की शुरू कर रहे हैं ।पृथ्वी के वातावरण में अंधाधुंध कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ रहे हैं ।हो रहा है क्लाइमेट चेंज जानें कैसे
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन जेसे देश क्लाइमेट चेंज की बात को अपने निजी फायदे के लिऐ सिरे से नकार रहे हैं ।हो सकता है आने वाले सालों में हम मालदीव जैसे छोटे-छोटे देशों कोई ना देख पाए हमारे समुद्रों का जलस्तर ग्लोबल वार्मिंग के कारण इतना ज्यादा बढ़ रहा है की आने बाले कुछ सालों में समुद्री किनारे बसे सभी शहर जल समाधि ले लेंगे । जिस तरह से आज के समय में जंगलों को काटा जा रहा है वर्षा वनों को नष्ट किया जा रहा है। कुछ देश अपने क्षणिक लाभ के लिए पूरी दुनिया को संकट में डाल रहे हैं ।जिसमें चीन का नाम सबसे ऊपर है जो की नदियों को दूषित कर रहा है। और साथ ही चीन के कारण पूरे विश्व के जानवरों के ऊपर एक बहुत बड़ा संकट है चीन में जानवरों का इतना बड़ा व्यापार है कि पूरी दुनिया के जानवर संकट में आ गए हैं। जैसे की गेंडे का सीग हाथी के दांत बाघ की खाल का व्यापार यह सब चीन के अंदर हो रहा है ।और फिर भी चीन के ऊपर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई भी दबाब नहीं बनाया जा रहा है ।और ना ही चीन इस मुद्दे पर अपने देश में कोई सख्त कानून बना रहा है ।अगर सब इसी तरह चलता रहा तो पृथ्वी पर अगली प्रलय आने में ज्यादा समय नहीं लगेगा और ना ही मानवता को नष्ट होने में ज्यादा समय लगेगा सोचने वाली बात यह है दोस्तों कि डायनासोरों को तो उल्कापिंड आता हुआ देखा भी नहीं था पर हम लोग तो सब कुछ देख कर भी अनजान बन रहे हैं ।महा प्रलय के साफ साफ संकेत देखने के बाद भी हम कुछ नहीं कर रहे हैं ।हाथ पर हाथ रखकर बैठे हैं। अगर सब कुछ इसी तरह चलता रहा तो क़यामत का दिन अब दूर नहीं ।अतः हम कह सकते हैं की जिस प्रकार वायुमंडल में कार्बनडाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है जिससे कि हमें सांस लेने में समस्या हो रही हैं उसी प्रकार हमारी पृथ्वी को भी सांस लेने में घुटन हो रही है। और हमारे साथ साथ हमारी पृथ्वी का जीवन भी संकट में है।
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